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सही-ग़लत(Sahi Galat Hindi Poem)

सही-ग़लत(Sahi Galat Hindi Poem)   रात के अँधेरे में अगर तुम, चेहरा ढक कर निकलोगे तो तुम्हे लोग पहचान लेंगे, तुम्हारी नियत जान लेंगे ।। तुम सही नहीं हो तुम जरुर सही नहीं हो तुम ग़लत हो या ग़लत करने जा रहे हो  ।। ...Read More

फ़ासले..(Fasale)

मैंने देखा अज़ीब सी घटना, जो थी बहुत खास  । मानव खा रहे  थे मांस, व कुत्ते खा रहे  थे घास   ।। उनके घर के बचे भोजन से , आज भी आ रही थी बांस  । मेरे घर के बच्चों को छोड़ो , ...Read More

आदमी की औकात (Adami ki Aukat)

एक माचिस की तिल्ली , एक घी का लोटा , लकड़ियों के ढेर पे कुछ घण्टे में राख… बस इतनीसी है आदमी की औकात ? एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया , अपनी सारी ज़िन्दगी , परिवार के नाम कर गया… कहीं रोने ...Read More

फिर मनाएगा कौन(Phir Manayega Kaun)

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? मैं चुप, तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ? बात छोटी सी लगा लोगे दिल से, तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ...Read More

बड़े दिन हो गए

वो माचिस की सीली डब्बी, वो साँसों में आग, बरसात में सिगरेट सुलगाये बड़े दिन हो गए। वो दांतों का पीसना, वो माथे पर बल, किसी को झूठा गुस्सा दिखाए बड़े दिन हो गए। एक्शन का जूता और ऊपर फॉर्मल सूट, बेगानी शादी में ...Read More

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