सही-ग़लत(Sahi Galat Hindi Poem)

सही-ग़लत(Sahi Galat Hindi Poem)   रात के अँधेरे में अगर तुम, चेहरा ढक कर निकलोगे तो तुम्हे लोग पहचान लेंगे, तुम्हारी नियत जान लेंगे ।। तुम सही नहीं हो तुम जरुर सही नहीं हो तुम ग़लत हो या ग़लत करने जा रहे हो  ।। तूने ऐसा क्या किया, कि  अपना चेरा ढक लिया ? चोरी […]

फ़ासले..(Fasale)

मैंने देखा अज़ीब सी घटना, जो थी बहुत खास  । मानव खा रहे  थे मांस, व कुत्ते खा रहे  थे घास   ।। उनके घर के बचे भोजन से , आज भी आ रही थी बांस  । मेरे घर के बच्चों को छोड़ो , चूहें भी है उदास  ।। वहां होती अतिवृष्टि  से जीवन त्रास- […]

माँ का आंचल

  जब आंख खुली तो अम्‍मा की गोदी का एक सहारा था उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको भूमण्‍डल से प्‍यारा था उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों सा खिलता था उसके स्‍तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता था हाथों से बालों को नोंचा पैरों से खूब प्रहार किया फिर भी उस मां […]

तनहा ही रह गया

न मैं स्मार्ट बनने की कोशिश करता हूँ, और न ही मैं परियों पे मरता हूँ। वो एक भोली सी लड़की है, जिसे मैं मोहब्बत करता हूँ। उसकी तस्वीर मेरी दिलों दिमाग व आखों में बसी है, मगर ‘हाय’ वो किसी और को दिल दे चुकी है। अब एक ही बात मुझे खटकती है हर रोज़, […]

आदमी की औकात (Adami ki Aukat)

एक माचिस की तिल्ली , एक घी का लोटा , लकड़ियों के ढेर पे कुछ घण्टे में राख… बस इतनीसी है आदमी की औकात ? एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया , अपनी सारी ज़िन्दगी , परिवार के नाम कर गया… कहीं रोने की सुरसुरी , तो कहीं फुसफुसाहट , अरे जल्दी ले जाओ […]

फिर मनाएगा कौन(Phir Manayega Kaun)

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? मैं चुप, तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ? बात छोटी सी लगा लोगे दिल से, तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ? दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर, सोचो हाथ फिर […]

बड़े दिन हो गए

वो माचिस की सीली डब्बी, वो साँसों में आग, बरसात में सिगरेट सुलगाये बड़े दिन हो गए। वो दांतों का पीसना, वो माथे पर बल, किसी को झूठा गुस्सा दिखाए बड़े दिन हो गए। एक्शन का जूता और ऊपर फॉर्मल सूट, बेगानी शादी में दावत उड़ाए बड़े दिन हो गए। ये बारिशें आजकल रेनकोट में […]

आहिस्ता चल जिंदगी

आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी कई  कर्ज  चुकाना  बाकी  है कुछ  दर्द  मिटाना   बाकी  है कुछ   फर्ज निभाना  बाकी है                    रफ़्तार  में तेरे  चलने से                    कुछ रूठ गए कुछ छूट गए                    रूठों को मनाना बाकी है                    रोतों को हँसाना बाकी है कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए उन टूटे […]

छोड़िये बीती बातों का गम क्या करे…

अपनी आँखों को अब और नम क्या करे छोड़िये बीती बातों का गम क्या करे।।   इसलिए हमने उनका यकीं कर लिया खा रहे थे क़सम पे क़सम क्या करे।।   ये तो सूरज को ख़ुद सोचना चाहिए धुप में जल रहे थे क़दम क्या करे।।   मौत आगे भी है मौत पीछे भी है […]

Get more stuff like this
in your inbox

Subscribe to our mailing list and get interesting stuff and updates to your email inbox.