आदमी की औकात (Adami ki Aukat)

एक माचिस की तिल्ली , एक घी का लोटा , लकड़ियों के ढेर पे कुछ घण्टे में राख… बस इतनीसी है आदमी की औकात ? एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया , अपनी सारी ज़िन्दगी , परिवार के नाम कर गया… कहीं रोने की सुरसुरी , तो कहीं फुसफुसाहट , अरे जल्दी ले जाओ […]

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