सही-ग़लत(Sahi Galat Hindi Poem)

 

रात के अँधेरे में अगर तुम,

चेहरा ढक कर निकलोगे तो

तुम्हे लोग पहचान लेंगे,

तुम्हारी नियत जान लेंगे ।।

तुम सही नहीं हो

तुम जरुर सही नहीं हो

तुम ग़लत हो या

ग़लत करने जा रहे हो  ।।

तूने ऐसा क्या किया, कि

 अपना चेरा ढक लिया ?

चोरी की या डकैती की

खून किया या किसी की

इज्जत लूट ली  ?

आखिर कौन सा

ऐसा काम किया, कि

तूने अँधेरे में भी

 आपना चेहरा ढक लिया  ?

२.

तुम सही नहीं हो

तुम जरूर सही नहीं हो ।।

तुम गलत हो,

तुम ग़लत ही हो ।।

सही आदमी को कैसा डर,

क्यों छुपाये चेहरा या सर ।।

ये तो चलते है अपने पथ पर

होके निडर …

अँधेरा हो रात का..या हो दिन दोपहर  ।।

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