कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं (Kuch Dost Bahut Yaad Aate Hai)

frindship

मै यादों का
किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत
याद आते हैं.

मै गुजरे पल को सोचूँ
तो,  कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.

अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी

कोई girlfriend  में busy है
कोई बीवी के पीछे crazy हैं
किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
कोई पढने में डूबा है
किसी की दो दो महबूबा हैं
सारे यार गुम हो गये हैं
तू से आप और तुम हो गये है
मै गुजरे पल को सोचूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
स्पस्टीकरण- प्रस्तुत कविता Social Media से लिया गया है और इसके लेखक का नाम ज्ञात नहीं है इस कारण यह रचना  इसके मूल अज्ञात रचनाकार को समर्पित है। UtsavMantra इसपर किसी प्रकार का Copyright का दावा नहीं करता है

 

kuch dost bahut yaad aate hai

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2 Replies to “कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं (Kuch Dost Bahut Yaad Aate Hai)”

  1. रचना यहाँ शेयर करने के लिए हार्दिक धन्यवाद. इसके मूल रचनाकार डॉ हरिवंश राय बच्चन हैं. धन्यवाद.

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