फ़ासले..(Fasale)

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मैंने देखा अज़ीब सी घटना,

जो थी बहुत खास  ।

मानव खा रहे  थे मांस,

व कुत्ते खा रहे  थे घास   ।।

उनके घर के बचे भोजन से ,

आज भी आ रही थी बांस  ।

मेरे घर के बच्चों को छोड़ो ,

चूहें भी है उदास  ।।

वहां होती अतिवृष्टि  से

जीवन त्रास- त्रास   ।

यहाँ फूटी अंख दृष्टि भी-

तक रही आकाश ।।

उनके जनम दिन पर आज-

लुटाये जा रहे वस्त्र खासम – खास   ।

इनके मरण दिन पर आज –

एक कफ़न के लिए भी तरस रही है लाश ।।

 

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Fasale Hindi Poem

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