flower UtsavMantra

अपनी आँखों को अब और नम क्या करे
छोड़िये बीती बातों का गम क्या करे।।
 

इसलिए हमने उनका यकीं कर लिया

खा रहे थे क़सम पे क़सम क्या करे।।
 

ये तो सूरज को ख़ुद सोचना चाहिए

धुप में जल रहे थे क़दम क्या करे।।
 

मौत आगे भी है मौत पीछे भी है

अब यही ज़िन्दगी है तो हम क्या करे।।
 

अब आ ही गए बाज़ार में हम भी

अपनी कीमत को अब और कम क्या करे।।
 
अपनी आँखों को अब और नम क्या करे
छोड़िये बीती बातों का गम क्या करे।।
स्पस्टीकरण- प्रस्तुत कविता सोशल मिडिया से लिया गया है और इसके लेखक का नाम ज्ञात नहीं है इस कारण यह रचना  इसके मूल अज्ञात रचनाकार को समर्पित हैΙ UtsavMantra इसपर किसी प्रकार का Copyright का दावा नहीं करता हैΙ

 

( chhodiye biti baton ka gum kya kare)

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