लघु कथा Archive

भाग्य से ज्यादा और समय से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा

एक सेठ जी थे । जिनके पास काफी दौलत थी। सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी। परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया। जिससे सब धन समाप्त हो गया। ...Read More

रामायण कथा का एक अंश (Ramayana katha)

रामायण कथा का एक अंश जिससे हमे *सीख* मिलती है *”एहसास”* की… *श्री राम, लक्ष्मण एवम् सीता’ मैया* चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे, राह बहुत *पथरीली और कंटीली* थी ! की यकायक *श्री राम* के चरणों मे *कांटा* चुभ गया ! श्रीराम ...Read More

“सुखी” सुख बाँटता है

एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था। ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गयी। ऑटो चालक ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते टकराते बची।   ...Read More

खुशी हमारे मन में होती है…

जंगल में एक कौआ रहता था जो अपने जीवन से पूर्णतया संतुष्ट था।लेकिन एक दिन उसने बत्तख देखी और सोचा, “यह बत्तख कितनी सफ़ेद है और मैं कितना काला हूँ। यह बत्तख तो संसार की सबसे ज़्यादा खुश पक्षी होगी।” उसने अपने विचार बत्तख ...Read More

पैसे की थैली किसकी (Akbar-Birbal)

  दरबार लगा हुआ था। बादशाह अकबर राज-काज देख रहे थे। तभी दरबान ने सूचना दी कि दो व्यक्ति अपने झगड़े का निपटारा करवाने के लिए आना चाहते हैं। बादशाह ने दोनों को बुलवा लिया। दोनों दरबार में आ गए और बादशाह के सामने ...Read More

मैं आपका नौकर हूं, बैंगन का नहीं (Akbar-Birbal)

एक दिन बादशाह अकबर और बीरबल महल के बागों में सैर कर रहे थे। फले-फूले बाग को देखकर बादशाह अकबर बहुत खुश थे। वे बीरबल से बोले, ‘बीरबल, देखो यह बैंगन, कितनी सुंदर लग रहे हैं!’ इनकी सब्जी कितनी स्वादिष्ट लगती है! बीरबल, मुझे ...Read More

विद्वत्ता का घमंड

महाकवि कालिदास के कंठ में साक्षात सरस्वती का वास था I शास्त्रार्थ में उन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता था Ι अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान पाकर एक बार कालिदास को अपनी विद्वत्ता का घमंड हो गया Ι उन्हें लगा कि उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया है ...Read More

मुफ्तखोर मेहमान (Muftkhor Mehman)

एक राजा के शयनकक्ष में मंदरीसर्पिणी नाम की जूं ने डेरा डाल रखा था। रोज रात को जब राजा जाता तो वह चुपके से बाहर निकलती और राजा का खून चूसकर फिर अपने स्थान पर जा छिपती। संयोग से एक दिन अग्निमुख नाम का ...Read More

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